मन के आगे हार है


मन के आगे हार है


कुछ बातें दिल में क्यों रह जाती है, हम कितनी कोशिश करते हैं पर निकल नहीं पाती। ऐसा क्या है और क्यों हैं कि हम सब जानते हुए या ना जानते हुए अपने लिए एक गड्ढा खोदना शुरू कर देते हैं। परिस्थितियों के हाथों मजबूर रहते हैं या कि खुद अपने मन से बेबस होते हैं. हर एक हमारी कोशिश नाकाम हो जाती है। हम बड़े दुखी महसूस करते हैं खुश नहीं रहते,हर समय चिड़चिड़े रहते हैं। सब कुछ उस बात के पहले भी वैसा ही था तब शायद सब कुछ अच्छा लगता था, पर अब वही सब चीजें हमें बड़ी बुरी लगती है या अच्छी नहीं लगती।

मन को बस में करना बता दो यारो
इस रहस्य की चाबी कहां रखी है मेरे प्यारों
इसे समझने में कितनी बार हार गया
जीतना है अब इसलिए ढूंढ रहा हूं यह राज यारों

- वर्षा खेमानी (उलझी)


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