संदेश

फ़रवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जिंदगी के रंग

जिंदगी के रंग  अधूरा मन अधूरी बाते और अधूरा ख्वाब अधर में अटकी समझ और ढेर सारे सवाल उलझी जिंदगी उलझे रिश्ते और उलझा ये संसार संकरी गली लंबे रास्ते थके हुए कदम फिलहाल ढेर सारी जिम्मेदारी ढेर सारी तकलीफ और ढेर सा काम भागते रहे उम्रभर पर दिल में रहा मलाल गलत संगत गलत सोच और गलत हर एक काम कैसे छलके ये क्यूँकि सब के खून का रंग है लाल भटकती रूह भटकता इंसान और भटकती कायनात उमीदों की इस दुनिया में हर कोई बुन रहा है जाल रूकती सांसे रूकती हंसी और रुके हुए हम सब छुपकर रह नहीं सकते क्यूंकि हम से बड़ा है काल प्यारा बचपन प्यारी मुस्कराहट और सबकी प्यारी माँ हम और हमारी इच्छाए और हमारा वही हाल नयी आशाए नयी बातें और नयी जिंदगी की किरण सबकुछ सही मन ले पर कोई ग़लतफ़हमी मत पाल प्यारे रिश्ते प्यारा घर और प्यारा परिवार यहीं  हमारी जिंदगी है और यही हमारा ख्याल हिम्मत से लड़ोंगे हिम्मत से करोंगे और हिम्मत दिखाओगे तभी तुम बन पाओगे किसी की मिसाल - वर्षा खेमानी (उलझी)

चल, आ चले

चल, आ चले   चल, आ चले       इस दिनचर्या से दूर       कही पेड़ की छाँव के नीचे       चिड़ियों की आवाजों के पास       ठंडी बायरो की पनाह में चल, आ चले       नदियों की कल कल के संगीत में&       नीले से आसमान की चादर पर       हरे हरे घास के बिछे बिस्तर       इस दुनिया के शोर से कही दूर चल, आ चले       सालों से चढ़ी थकान को उतारने       प्रकर्ति की बाँहो में सोने       अपने अन्तः मन को सुनने       सुनसान सी उस जगह चल, आ चले       उस जगह की सुंदरता आँखों में बसाकर       मन में अथाह शांति लिए       होठो पर हल्की  सी गुनगुनाहट लिए       चल, आ चले  उस दिनचर्या को फिर जीने। - वर्षा खेमानी (उलझी)

मन के आगे हार है

मन के आगे हार है कुछ बातें दिल में क्यों रह जाती है, हम कितनी कोशिश करते हैं पर निकल नहीं पाती। ऐसा क्या है और क्यों हैं कि हम सब जानते हुए या ना जानते हुए अपने लिए एक गड्ढा खोदना शुरू कर देते हैं। परिस्थितियों के हाथों मजबूर रहते हैं या कि खुद अपने मन से बेबस होते हैं. हर एक हमारी कोशिश नाकाम हो जाती है। हम बड़े दुखी महसूस करते हैं खुश नहीं रहते,हर समय चिड़चिड़े रहते हैं। सब कुछ उस बात के पहले भी वैसा ही था तब शायद सब कुछ अच्छा लगता था, पर अब वही सब चीजें हमें बड़ी बुरी लगती है या अच्छी नहीं लगती। मन को बस में करना बता दो यारो इस रहस्य की चाबी कहां रखी है मेरे प्यारों इसे समझने में कितनी बार हार गया जीतना है अब इसलिए ढूंढ रहा हूं यह राज यारों - वर्षा खेमानी (उलझी)