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दिल की हसरत

दरवाजे की ओट से झांका मत करो  तरसती आंखों को  बेक़रार मत करो  तुम चली जाती हो  अपनी आधी अधूरी सी  झलक दिखला कर  छोड़ जाती हो मन को  सपनों में हिचकोले खाते  तुम्हारी उसी झलक को  पूरी करने में लग जाता  कयासों से कोशिश करता  और कभी हार जाता  जब तुम पूरी हो जाती  आंखों में चमक आ जाती  जब ना बना पाता  बेचैनी बढ़ जाती  कोसता, काश फिर देख पाता  पर हिम्मत ना हारता  तुम हर एक रुप में  हर एक अंदाज में  हर एक पल के लिए  हरदम रहती हो खास  दरवाजे की ओट से  झांका तो करो  दिल की हसरतों को  समझा भी करो